Thursday, September 2, 2010

VoTe SuPPoRt



Vote Support Elect दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ(डूसू)2010 का प्रचार तो ज़ोरों से चल रहा है। प्रचार में हाईटेक माध्यम के साथ-साथ परंपरागत तरीके का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इन सबके बीच एक ज़रूरी सूचना ये है कि मतदान का समय सुबह 8:30 से 12:30 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक का समय निर्धारित है। मतदान की तारीख़ 3 सितंबर है। जबकि मतों की गिनती का काम 4 तारीख़ को होगा। ऐसे में एनएसयूआई की तरफ से सभी छात्रों से अपील है कि वो अपनी ताक़त को पहचाने और वोट करें ताकि उनके दारा एक बेहतर कर्मप्रधान और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति जीते। एनएसयूआई को छात्रों से पूरी उम्मीद है कि छात्र संघ भारी मतों से उनके संगठन को ही विजयी बनाएगा। इसके लिए उन्होनें अपनी तरफ से पूरी मेहनत की है। एनएसयूआई जहां (Success is All Yours) के नारे पर चल रही है, वहीं वो इस बात को मानती है कि Voting is Your Right Please Cast your Vote.



HARISH CHAUDHARY
PRESIDENT, PANEL NO. – 5

A.A.VARDHAN CHAUDHARY
VICE PRESIDENT, PANEL NO. – 1


DEEPIKA DESHWAL
SECRETARY, PANEL NO. – 3


AKSHAY KUMAR
JOINT SECRETARY, PANEL NO. – 2


Voting Date And Time:- 3rd of September from 08:30-12:30 TO 4:00-8:00 p.m


Please give ur Support.






डूसू में फिर रचेंगे इतिहास : NSUI


दिल्ली विश्वविद्यालय चुनावों का मतदान के पूर्व दिन एनएसयूआई कार्यालय में सभीकॉलेज इकाइयों तथा प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई जिसमें एनएसयूआई केप्रत्याशियों के समर्थन में पूरे दिन मुस्तैदी से लगे रहने के निर्देश दिए गए। गौरतलब हैकि एनएसयूआई ने अपने उम्मीदवारों का चयन भी इन्हीं 412 कॉलेज इकाईयों तथाप्रतिनिधियों के मतदान द्वारा किया। इस कारण से सभी उम्मीदवारों को दिल्लीविश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों से भारी समर्थन मिल रहा है। आज राष्ट्रीय कार्यालय में एनएसयूआईइकाईयों की बैठक हुई जिसमें एनएसयूआई प्रभारी तथा सांसद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि हमारेउम्मीदवारों को कॉलेज इकाईयों ने चुने है, किसी कार्यालय में बैठकर दो-तीन नेताओं नहीं इसलिए हरीश, वर्धन, दीपिका और अक्षय भारी मतों से जीतकर दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास बनाएगें। इसी के साथयूथ कांग्रेस की भी बैठक आयोजित की गई तथा सभी कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्र में मजबूती से कार्यकर एनएसयूआई को विजयी बनाने की मुहिम तेज की गई।
एनएसयूआई अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के स्थानीय तथा नार्थ-साउथ कैम्पस में अच्छी पकड़ के साथ हीयमुना पार के स्थानीय होने के कारण भारी समर्थन मिल रहा है। हरीश चौधरी ने कहा कि, ‘मैं एनएसयूआईसंगठन का एक सिपाही तथा मेरा संगठन भारत के हर भारतीय को यहाँ का नागरिक समझ कर कार्य करता है।इसलिए उत्तर भारतीय हो दक्षिण भारतीय हो या नार्थ ईस्ट का साथी या राजस्थान का वासी सबका हमेंअच्छा समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही एनएसयूआई के नेतृत्व में दिल्ली विश्वविद्यालय में सभी क्षेत्रों मेंबेहतर कार्य किया है इसलिए इस बार भी छात्रों का भारी मत और समर्थन हमें ही प्राप्त होगा।
उपाध्यक्ष पद के उम्मीदार एए वर्धन चौधरी ने कहा कि, ‘मैं संगठन का सिपाही हूँ। दिल्ली विश्वविद्यालय मेंहमारे संगठन नें बेहतर कार्य किया है। सांप्रदायिक और जातिवादी विचारधारा के खिलाफ हम लड़े है और आगेभी लड़ते रहेंगे। छात्रों के बस, मेट्रो, परिक्षा परिणाम तथा सेमेस्टर सिस्टम के लिए कार्य करेंगे। इसलिए मुझेपूरी उम्मीद है कि सांप्रदायिक-जातिवादी-फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ मजबूत गठजोड़ के तौर पर छात्रहमारे साथ जुड़ेगें। गौरतलब है कि एए वर्धन दिल्ली प्रदेश एनएसयूआई के उपाध्यक्ष के साथ ही रामजस सीसीतथा डीयू ईसी भी रहे है।
दिल्ली विश्वविद्यालय महासचिव पद की उम्मीदवार दीपिका देशवाल ने कहा कि हमारे संगठन नें सबसेअधिक छात्राओं को दिल्ली विश्वविद्यालय में मौका दिया है, शालू मलिक, अल्का लांबा से रागिनी नायक, अमृता धवन तक सभी छात्राओं को दिल्ली विश्वविद्यालय ने सर आँखो पर बिठा कर रखा। एनएसयूआई केसभी साथियों ने बेहतर कार्य किया इस कारण से आज सभी सक्रिय राजनीति में है लेकिन विपक्षी संगठन नेछात्राओं को राजनीति में कभी स्थान ही नहीं दिया इस कारण से विपक्षी संघटनों से राजनीति के पथ पर एकभी नैत्री आगे नहीं बढ़ी। इसके साथ ही दीपिका ने कहा कि मैं दिल्ली की बेटी हूँ, और मुझे दिल्लीविश्वविद्यालय में भारी समर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि दीपिका दिल्ली एनएसयूआई की प्रदेशमहासचिव, कॉलेज की सीसी तथा डीयू की ईसी रहने के साथ ही जुड़ो-रेसलिंग की राष्ट्रीय खिलाड़ी तथा अपनेकॉलेज की टॉपर भी रही है। दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी अध्यक्ष परमजीत सरना ने कहा कि, ‘दिल्ली मेंपहली बार जाट बेटी चुनावी मैंदान में है इसलिए हम सभी इन्हें मिलकर भारी मतों से विजयी बनाएगें।
संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार अक्षय कुमार ने कहा कि, ‘एनएसयूआई एक मात्र संगठन है जो SC,ST,OBC के हितों के लिए संघर्ष करता है तथा छात्रवृत्ति हो या अंबेडकर स्टूच्यू का मामला सभी मसलों पर मजबूती सेखड़ा होता है। कालका जी कैम्पस हो या आउटर सभी जगहों पर एनएसयूआई को भारी समर्थन मिल रहा है।गौरतलब है अक्षय कुमार दलित समुदाय से संबंध रखते है तथा पूरे दिल्ली विश्वविद्यालय के उम्मीदवारों मेंइकलौते दलित है। दलित छात्रों के रुप में इससे पहले भी तरुण कुमार, उपाध्यक्ष पर जीते थे जबकी विपक्षीसंगठनों ने कभी भी किसी दलित नेता को दिल्ली विश्वविद्यालय को उम्मीदवार नहीं बनाया है।

Wednesday, September 1, 2010

NSUI ने लड़कियों को भी दी तरज़ीह


चुनावों में जीत-हार के बजाय किन मुद्दों को लेकर हम देश की राजनीति में भागीदारी कर रहे हैं, साथ ही हमारी विचारधारा और हमारे दारा किए गए कार्य चुनावी रंग को तय करते हैं। इस आधार पर अगर कहें तो एनएसयूआई एक मात्र ऐसा छात्र संगठन है जिसमें सभी वर्ग के छात्रों को सक्रिय राजनीति में आने का बराबर मौका मिलता है। वो चाहे छात्र हो या छात्रा, दलित हो या अल्पसंख्यक सबके लिए उसके दरवाजे खुले हैं। इसके बरक्स एबीवीपी जातिवादी और सांप्रदायिक विचारधारा के पोषक तत्वों को अपने पैनल में स्थान देती है तथा राजनीति की प्राथमिक पाठशाला में प्रवेश के साथ ही ये नए राजनीति के पौधे भावी राजनीति में धुँधले हो जाते हैं। यदि दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास पर गौर करें तो एनएसयूआई संगठन छात्रों के साथ-साथ छात्राओं को भी बराबर का अधिकार देता है। साथ ही राजनीति की प्राथमिक पाठशाला एनएसयूआई राजनीति करने वाले सभी साथियों को भविष्य में भी बराबर मौका प्रदान करती है।

1994

शालू मलिक*

1995

अल्का लांबा*

1996

प्रिया गुप्ता

1997

पूनम पाराशर

1998

निधी पुरी

2001

नीतू वर्मा*

2002

रागिनी नायक

2005

रागिनी नायक*

2006

अमृता धवन*

2007

अमृता बाहरी*

2008

सोनिया सपरा

यदि छात्राओं की दिल्ली विश्वविद्यालय में भागीदारी की बात करें तो इस रण में NSUI ने ही बाज़ी मारी है। पिछले 15 सालों के इतिहास की बात करें तो दिल्ली विश्विद्यालय के चुनावों में शालू मलिक, अल्का लांबा,नीतू वर्मा, रागिनी नायक, अमृता धवन और अमृता बाहरी ने सांप्रदायिक और जातिवादी विचारधारा को करारी मात दी है। जबकी एबीवीपी की कुछ गिनी-चुनी छात्राएँ राजनीति में आई, जिनका वर्तमान समय में कोई नाम सुनाई नहीं देता। जबकी एनएसयूआई से विजयी छात्राओं को संगठन ने पूरा सहयोग और मौका दिया और उनका मॉरल भी खूब बढ़ाया है।

सन् 1994 में डूसू की अध्यक्ष शालू मलिक की बात करें तो यूथ कांग्रेस से राष्ट्रीय सचिव पद के साथ ही 1997 में पार्षद का चुनाव लड़ीं और विजयी हुईं। इसके साथ ही वर्तमान में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में हैं। 1995 की डूसू अध्यक्ष अल्का लांबा 1998 में एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। साथ ही 2003 में मोतीनगर विधानसभा की उम्मीदवार भी रहीं। वर्तमान में अल्का लांबा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव है। 2001 की एनएसयूआई डूसू अध्यक्ष नीतू वर्मा ने 2002 में नगर निगम पार्षद का चुनाव लड़ा और विजयी रहीं और इसके बाद यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव बनीं। वहीं रागिनी नायक, अमृता बाहरी और अमृता धवन सभी एनएसयूआई राष्ट्रीय कार्यकारणी की हिस्सेदार रहीं हैं। इसके बरक्स एबीवीपी ने मात्र तीन छात्राओं को आज तक अध्यक्ष पद पर मौका दिया साथ ही इस समय विजयी छात्राओं का वर्तमान समय में राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। ये है एनएसयूआई और एबीवीपी की राजनीति और विचारधारा का फर्क...............

बात मुद्दे की :-- NSUI की मांग

> दाखिले में पारदर्शिता होनी चाहिए। ओबीसी कोटे के छात्रों को अलग से दाखिले की व्यवस्था हो।

> डीयू के सिर्फ दो कॉलेजों में बी.बी.ए. कोर्स है। उसे बढ़ाकर 5 कॉलेजों में किया जाए।

> हर कॉलेज में हॉस्टल की सुविधा हो। छात्राओं के लिए हर कॉलेज में हॉस्टल बनवाए जाएं।

> मेट्रो में छात्रों के लिए पास सिस्टम लागू हो। कैम्पस में रिक्शों के किरायों में सुधार हो।

> नार्थ कैम्पस से साउथ कैम्पस तक यू स्पेशल बसें चलाने की कोशिश करेंगे। यू स्पेशल बसों की सर्विस बढ़ाई जाए।

> वाई-फाई इंटरनेट की सुविधा जल्द दी जाए जिससे छात्रों को इंटरनेट के ज़रिए पूरे डीयू से जोड़ा जा सके। नेत्रहीन छात्रों के लिए ब्रेल सॉफ्टवेयर सभी कॉलेजों में हों।

> यौन उत्पीड़न के केसों की सुनवाई जल्द से जल्द कराकर उसे निपटाने की कोशिश की जाए।

> एकेडेमिक काउंसिल में एक छात्र प्रतिनिधि भी होना चाहिए, जिससे छात्रों की मांगों को अच्छी तरह से रखा जा सके।

> प्राइवेट हॉस्टल पर लगाम लगाने के साथ उनके यहां रेन्ट में पारदर्शिता हो इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए।

साम्प्रदायिक विचारधारा की पोषक है ABVP

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव के NSUI से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी “हरीश चौधरी” ने कहा कि हिंदुस्तान की राजनीति में तीन तरह की राजनैतिक विचारधारा महत्वपूर्ण रुप से कार्य करती है। एबीवीवी की विचारधारा जो साम्प्रदायिकता, हिंसा और अराजकता का माहौल पैदा कर सत्ता में आना चाहती है। गोधरा से कंदमाल तक दंगों की सियासत करते है। वहीं दूसरी तरफ साम्यवादी-नक्सली विचारधारा है जो हिंसा का रास्ता अख्तियार कर सत्ता हासिल करना चाहती है जबकि मैं उस विचारधारा का समर्थक हूँ, जो देश के संविधान में विश्वास करती है तथा लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष-समाजवादी भारत के निर्माण में संलग्न है। श्री चौधरी ने आगे कहा कि एनएसयूआई का मानना है कि भारत में रहने वाले हर भारतीय का यह देश है। इसके विकास और निर्माण में उसका योगदान महत्वपूर्ण है सबकी साम्प्रदायिक विचारधारा की पोषक एबीवीपी मात्र धर्म और जाति की राजनीति कर डूसू में आंतक का माहौल पैदा करना चाहती है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए और ना ही आज का पढ़ा लिखा वर्ग ऐसी बातों में अपना विश्वास रखता है।

NSUI से संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशीअक्षय कुमारनेनार्थ कैम्पस के सभी छात्रों को ये कहा कि सभी कमज़ोर औरपिछड़े वर्गों के सभी छात्रों को छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए।एन.एस.यू.आई ने पहली बार आतंरिक मतदान प्रक्रिया कोअपना कर लोकतंत्र का भी मान रखा। अक्षय ने कहा किओबीसी कोटा होने के बावजूद ज्यादतर कॉलेजों में सीट खालीही रह जाती हैं और स्टूडेंट्स का एडमिशन भी नहीं हो पाताउन्होंने इस बात की मांग कि ओबीसी छात्रों के लिए अलगपंजीकरण प्रक्रिया हो। अनुसूचित जाति और जनजाति केछात्रों को ये आज़ादी होनी चाहिए कि वो दूसरे छात्रों की तरहही अपने कॉलेज को बिना किसी बाधा के चुन सकें।


दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव के NSUI से उपाधयक्ष पद के उम्मीदवार ..वर्धन चौधरी ने कहा कि हम सेमेस्टर सिस्टम के खिलाफ नहीं बल्कि उसके प्रभावी ढंग से लागू किए जाने को लेकर सज़ग हैं।जब तक हमारे छात्र-छात्राओं के लिए दिल्ली विश्वविधालय में मूलभूत सुविधाओं का प्रबंध नहीं हो जाता तब तक हम इसके खिलाफ हैं। यूजीसी ने सेमेस्टर सिस्टम को पूरे देश में लागू करने की बात कही है जबकि डीयू में अभी पूरे वार्षिक स्तर पर रिज़ल्ट नहीं पाता तो ऐसे में इसको कैसे लागू किया जा सकता है।उन्होंने आगे कहा कि हमें अपने पूरे संसाधनों को एकजुट करके इसे लागू करना चाहिए।



जबकि अपने कैंपेन के दौरान बाहरी दिल्ली के सभी कॉलेजों में गई सचिव पद की प्रत्याशी दीपीका देशवाल ने भारत में खेलों की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए। वो खुद एक जूडो ओर कराटे की खिलाडी हैं। उन्होनें राष्टमंडल खेलों के सफल आयोजन के लिए भी कामना की और ये माना कि इससे देश में खेलों को बढ़ावा मिलेगा और देश को अन्तर्राष्टीय स्तर के मैदान फैसीलिटी मिलेगी। दीपिका ने लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी चिंता जताई और सुरक्षा ढाचें में सुधार की ज़रूरत को महसूस किया। साथ ही लड़कियों के हॉस्टल संबंधी प्रबंध हों ताकि छात्राओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो।उन्होंने इस बात को भी माना की दिल्ली विश्वविधालय में लड़कियों के हॉस्टल काफी कम हैं उनका निर्माण होना चाहिए।