NSUI ऐसे छात्रों को वो मंच मुहैया कराता है। जिसकी वजह से इनमें नई उमंग, उत्साह, साहस और काम को करने का बल मिलता है। कहते हैं कि युवा जोश से लबरेज़ होते हैं लेकिन सिर्फ जोश से ही सारे कार्य संभव नहीं, इसीलिए NSUI छात्रों को जोश के साथ-साथ होश से भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
रही बात NSUI से संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी “अक्षय कुमार” की...तो सदा से ही सभी को साथ लेकर चलनेवाले अक्षय मानते हैं कि “देश जिस ताक़त और बदलाव को महसूस कर रहा है, उसके लिए NSUI का भी इसमें काफी बड़ा योगदान रहा है। NSUI ने पहली बार राजनीतिक संगठन में छात्राओं तथा ज़मीनी लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की वकालत पर ज़ोर दिया है।"
ये बात तो जगज़ाहिर है कि भारतीय संविधान के रचयिता दलित परिवार से थे। लेकिन NSUI ने दलित छात्रों को भी राजनीतिक मंच पर एक बेहतर शुरूआत का मौका दिया है ताकि इससे समाज और देश का भला हो और भारत जैसे विभिन्नता में एकता के देश में सदैव आपसी सदभाव और भाईचारा बना रहे।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है ऐसे में ये कुछ ज़रूरी चीज़े होनी ही चाहिएं। ये वाक्ई क़ाबिले तारीफ है। मेरी ये आशा है कि देश के युवा मुख्यधारा से जुड़ें ताकि भारत जैसा विकासशील देश निरंतर तरक्की कर सके।
ReplyDeleteमाना कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो पुरी तरह प्रजा पर निहीत है जहां हमें कोई भी निर्णय लेने कि पूरी आजादी है चाहे वो किसी भी रुप में हो लेकिन क्या हम अपने देश के प्रति अपनी कोई दायित्व निभा रहे है? नही.....
ReplyDeleteतो ऐसे में जरुरी है कि हम आगें बढकर अपनी जिम्मेंदारीयो को समझें हमें पुरी उम्मीद है कि "सोने की चीड़ीया" कहा जाने वाला भारत देश की गरिमा पर फिर से चार चांद लग सकें ताकि हमारा देश निरंतर उन्नति के राह पर चलते रहें। जय हिंद।।।।।।।।।।।