Tuesday, August 31, 2010

बदलाव की बयार है NSUI

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में उतरे छात्र संगठन NSUI दाखिले में पारदर्शिता के अलावा छात्रावास की समस्याओं और ख़ास तौर पर डीयू में पनप रहे यौन उत्पीड़न जैसी सामाजिक बुराईयों को भी दरकिनार करना चाहता है।
एनएसयूआई के अध्यक्ष हिबी इडेन ने चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि उनका संगठन सेमेस्टर सिस्टम का विरोध करता है। क्योंकि इसे बिना ढांचागत विकास और पूर्ण सहमति के बिना थोप दिया गया है।

संगठन का मानना है कि विश्वविद्यालय को सभी परीक्षाओं के नतीजे नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले घोषित करना चाहिए। साथ ही उत्तर पुस्तिकाएं को छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इडेन ने कहा कि डीयू में दाखिला लेने वाले कमजोर वर्ग के सभी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जानी चाहिए। छात्राओं को तो विशेष तौर पर स्पेशल फेलोशिप दी जानी चाहिए।

इडेन ने बताया कि एनएसयूआई ने अपना घोषणापत्र छात्र-छात्राओं के बीच सर्वे कराकर बनाया है। इसमें संगठन ने ओबीसी दाखिले में पारदर्शिता लाने की बात कही है। कहा गया है कि ओबीसी की दाखिला प्रक्रिया सामान्य कोटे से अलग की जानी चाहिए। संगठन ने ओबीसी छात्र-छात्राओं के लिए पहली कट ऑफ में पूरी छूट देनी की मांग की है। साथ ही एससी-एसटी छात्रों को अपने हिसाब से कॉलेज चुनने की छूट देने की बात कही गई है। आंतरिक मू्ल्यांकन में मनमाने तरीके से अंकों में फेरबदल किए जाने को रोकने की मांग की गई है।

यही नहीं, इडेन ने कहा कि कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हरासमेंट में डूसू के पदाधिकारियों को सदस्य बनाया जाना चाहिए। ऐसे मामलों को जल्द निपटारा हो और पीड़ित को न्याय मिले। इसके लिए फुलटाइम काउंसलर की नियुक्ति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन का मानना है कि डीयू में साइकिल रिक्शा के किरायों पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। यू-स्पेशल बसों की संख्या बढ़ाना भी संगठन का मुद्दा है।

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