Monday, August 30, 2010

लोकतंत्र का परिचय दिया NSUI ने

अमूमन लोकतंत्र के राज में सत्तातंत्र हावी होता दिखता है...लेकिन संत्तातंत्र की बिसात पर चुने गए हमारे प्रतिनिधि के चुनाव में लोकतंत्र शायद ही अभीतक प्रभावी हो पाया है...यही वजह है कि NSUI ने इसबार ये पहल की और डूसू चुनाव के लिए चुने गए उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में आंतरिक मतदान कराकर लोकतंत्र का मान रख लिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के लिए बिना किसी खास माथापच्ची और बैठकबाजी के ही भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (डूसू) ने अपने अंतिम चार उम्मीदवारों के नाम 21 अगस्त को तय कर लिए। जबकि आमतौर पर प्रत्याशियों का चयन नामांकन वापसी के अंतिम पांच मिनट में होता है। गौरतलब है कि देशभर में किसी भी छात्र संगठन की ओर से पहली बार अपनाई गई आंतरिक मतदान की प्रक्रिया के जरिए जिन चार को चुना गया उनमें हरीश चौधरी, ए.ए.वर्धन चौधरी, दीपिका देशवाल और अक्षय कुमार शामिल हैं।

इस चुनाव प्रक्रिया में NSUI शीर्ष नेतृत्व के साथ ही कांग्रेस पार्टी सचिव तथा NSUI प्रभारी मीनाक्षी नटराजन और फेम पर्यवेक्षक जोसफ मैथ्यू भी मौजूद थे। इस प्रक्रिया के तहत हर दावेदार ने अपने विचार व्यक्त करने में चार मिनट का वक्त लिया। इस दौरान चौदह उम्मीदवारों ने सेमेस्टर सिस्टम से लेकर छात्रों की सुरक्षा और दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। सभी इच्छुक उम्मीदवारों के विचार व्यक्त करने के बाद NSUI के राष्ट्रीय कार्यालय में दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंधित कॉलेज इकाईयों और प्रतिनिधियों ने अपने पसंद के डीयू उम्मीदावारों के पक्ष में मत डाले।
NSUI दिल्ली के प्रभारी मोहम्मद शाहनवाज चौधरी ने बताया कि दो घंटे तक चले मतदान के दौरान कुल 412 वोट पड़े। इस चुनाव प्रक्रिया में हरीश चौधरी, वर्धन चौधरी और छात्राओं में दीपिका देशवाल और अनुसूचित जाति जनजाति के लिए अक्षय कुमार डूसू पैनल के लिए निर्वाचित हुए।

पैनल में छात्राओं तथा एससी/एसटी आरक्षण

दुनिया के किसी भी राजनीतिक संगठन में छात्राओं तथा हाशिए के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की वकालत करने का अच्छा प्रयास NSUI द्वारा किया गया। जहां दुनिया के सबसे मजबूत देश अमेरिका ने संगठन के आंतरिक लोकतंत्र के तहत चुनकर आए बराक ओबामा देश के राष्ट्रपति बने...उसी तरह NSUI ने दलित छात्रों को संगठन के तहत NSUI पैनल में जगह देकर राजनीतिक खेल में एक सकारात्मक शुरुआत की।

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