Wednesday, September 1, 2010

NSUI ने लड़कियों को भी दी तरज़ीह


चुनावों में जीत-हार के बजाय किन मुद्दों को लेकर हम देश की राजनीति में भागीदारी कर रहे हैं, साथ ही हमारी विचारधारा और हमारे दारा किए गए कार्य चुनावी रंग को तय करते हैं। इस आधार पर अगर कहें तो एनएसयूआई एक मात्र ऐसा छात्र संगठन है जिसमें सभी वर्ग के छात्रों को सक्रिय राजनीति में आने का बराबर मौका मिलता है। वो चाहे छात्र हो या छात्रा, दलित हो या अल्पसंख्यक सबके लिए उसके दरवाजे खुले हैं। इसके बरक्स एबीवीपी जातिवादी और सांप्रदायिक विचारधारा के पोषक तत्वों को अपने पैनल में स्थान देती है तथा राजनीति की प्राथमिक पाठशाला में प्रवेश के साथ ही ये नए राजनीति के पौधे भावी राजनीति में धुँधले हो जाते हैं। यदि दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास पर गौर करें तो एनएसयूआई संगठन छात्रों के साथ-साथ छात्राओं को भी बराबर का अधिकार देता है। साथ ही राजनीति की प्राथमिक पाठशाला एनएसयूआई राजनीति करने वाले सभी साथियों को भविष्य में भी बराबर मौका प्रदान करती है।

1994

शालू मलिक*

1995

अल्का लांबा*

1996

प्रिया गुप्ता

1997

पूनम पाराशर

1998

निधी पुरी

2001

नीतू वर्मा*

2002

रागिनी नायक

2005

रागिनी नायक*

2006

अमृता धवन*

2007

अमृता बाहरी*

2008

सोनिया सपरा

यदि छात्राओं की दिल्ली विश्वविद्यालय में भागीदारी की बात करें तो इस रण में NSUI ने ही बाज़ी मारी है। पिछले 15 सालों के इतिहास की बात करें तो दिल्ली विश्विद्यालय के चुनावों में शालू मलिक, अल्का लांबा,नीतू वर्मा, रागिनी नायक, अमृता धवन और अमृता बाहरी ने सांप्रदायिक और जातिवादी विचारधारा को करारी मात दी है। जबकी एबीवीपी की कुछ गिनी-चुनी छात्राएँ राजनीति में आई, जिनका वर्तमान समय में कोई नाम सुनाई नहीं देता। जबकी एनएसयूआई से विजयी छात्राओं को संगठन ने पूरा सहयोग और मौका दिया और उनका मॉरल भी खूब बढ़ाया है।

सन् 1994 में डूसू की अध्यक्ष शालू मलिक की बात करें तो यूथ कांग्रेस से राष्ट्रीय सचिव पद के साथ ही 1997 में पार्षद का चुनाव लड़ीं और विजयी हुईं। इसके साथ ही वर्तमान में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में हैं। 1995 की डूसू अध्यक्ष अल्का लांबा 1998 में एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। साथ ही 2003 में मोतीनगर विधानसभा की उम्मीदवार भी रहीं। वर्तमान में अल्का लांबा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव है। 2001 की एनएसयूआई डूसू अध्यक्ष नीतू वर्मा ने 2002 में नगर निगम पार्षद का चुनाव लड़ा और विजयी रहीं और इसके बाद यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव बनीं। वहीं रागिनी नायक, अमृता बाहरी और अमृता धवन सभी एनएसयूआई राष्ट्रीय कार्यकारणी की हिस्सेदार रहीं हैं। इसके बरक्स एबीवीपी ने मात्र तीन छात्राओं को आज तक अध्यक्ष पद पर मौका दिया साथ ही इस समय विजयी छात्राओं का वर्तमान समय में राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। ये है एनएसयूआई और एबीवीपी की राजनीति और विचारधारा का फर्क...............

1 comment:

  1. VERY NICE... CONGRET'S 2 ALL PARTICIPATED

    DEVSHI MODHWADIA
    VICE PRESIDENT - GUJARAT NSUI

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