Tuesday, August 31, 2010

बदलाव की बयार है NSUI

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में उतरे छात्र संगठन NSUI दाखिले में पारदर्शिता के अलावा छात्रावास की समस्याओं और ख़ास तौर पर डीयू में पनप रहे यौन उत्पीड़न जैसी सामाजिक बुराईयों को भी दरकिनार करना चाहता है।
एनएसयूआई के अध्यक्ष हिबी इडेन ने चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि उनका संगठन सेमेस्टर सिस्टम का विरोध करता है। क्योंकि इसे बिना ढांचागत विकास और पूर्ण सहमति के बिना थोप दिया गया है।

संगठन का मानना है कि विश्वविद्यालय को सभी परीक्षाओं के नतीजे नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले घोषित करना चाहिए। साथ ही उत्तर पुस्तिकाएं को छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इडेन ने कहा कि डीयू में दाखिला लेने वाले कमजोर वर्ग के सभी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जानी चाहिए। छात्राओं को तो विशेष तौर पर स्पेशल फेलोशिप दी जानी चाहिए।

इडेन ने बताया कि एनएसयूआई ने अपना घोषणापत्र छात्र-छात्राओं के बीच सर्वे कराकर बनाया है। इसमें संगठन ने ओबीसी दाखिले में पारदर्शिता लाने की बात कही है। कहा गया है कि ओबीसी की दाखिला प्रक्रिया सामान्य कोटे से अलग की जानी चाहिए। संगठन ने ओबीसी छात्र-छात्राओं के लिए पहली कट ऑफ में पूरी छूट देनी की मांग की है। साथ ही एससी-एसटी छात्रों को अपने हिसाब से कॉलेज चुनने की छूट देने की बात कही गई है। आंतरिक मू्ल्यांकन में मनमाने तरीके से अंकों में फेरबदल किए जाने को रोकने की मांग की गई है।

यही नहीं, इडेन ने कहा कि कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हरासमेंट में डूसू के पदाधिकारियों को सदस्य बनाया जाना चाहिए। ऐसे मामलों को जल्द निपटारा हो और पीड़ित को न्याय मिले। इसके लिए फुलटाइम काउंसलर की नियुक्ति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन का मानना है कि डीयू में साइकिल रिक्शा के किरायों पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। यू-स्पेशल बसों की संख्या बढ़ाना भी संगठन का मुद्दा है।

NSUI की प्रेस कॉन्फ्रेंस









डूसू चुनाव 2010 घोषणापत्र

डूसू चुनाव 2010 घोषणापत्र

The more one does, the more one attempts, the more one is capable of doing.

Indira Gandhi

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से एनएसयूआई पर अपना भरोसा बना रखा है। हमारे उम्मीदवार पिछले काफी सालों से रिकॉर्ड मार्जिन के साथ जीत हासिल करते रहे हैं। इस नतीजे से केवल एनएसयूआई के छात्रों की आस्था चिंतनशील नहीं है। डूसू ने अपने वायदे को वितरित करने के लिए नेतृत्व किया है। यह कार्य समर्थक छात्र के साथ एक सामान्य संतुष्टि को दर्शाता है, वहीं समर्थक युवा नीतियों के जरिए कांग्रेस ने केन्द्र में यूपीए सरकार का नेतृत्व किया है। पिछले सात वर्षों में मनमोहन सिंह सरकार ने लगातार शिक्षा के क्षेत्र में ध्यान केंद्रित करने के अपने मिशन का पालन किया है। चाहे नए आईआईटी और आईआईएम की स्थापना हो, सभी राज्यों में नए केंद्रीय विश्वविद्यालय, मध्याह्न भोजन पर खास जोर, सर्वशिक्षा अभियान को बढ़ावा या फिर छात्राओं के लिए छात्रवृति का प्रबंध, राजीव गांधी फेलोशिप और इसी साल पास किया गया ऐतिहासिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम..जो कि 14 साल के कम उम्र के बच्चों को तमाम जरुरी शिक्षा मुहैया कराता है। ये विधेयक निश्चित तौर पर आर्थिक रुप से पिछड़े और ग्रामीण परिवेश के बच्चों में निरक्षरता दर और बाल मजदूरी को कम करने में सहायक साबित होगा ताकि बच्चे अपनी जरुरतों के पूरा करते हुए अपनी शिक्षा को पूरा कर सकें।

पिछले साल छात्र संगठन चुनाव के दौरान कई राजनीतिक पार्टियों के बहुतेरे ऊम्मीदवार सिर्फ इस बात को लेकर असफल हो गए थे क्योंकि उन्होने चुनावी आचारसंहिता का उल्लंघन किया था। इस साल NSUI ने एक कदम आगे बढ़कर ये सुनिश्चित किया कि परंपरागत रुप के बजाए उन्हें आंतरिक मतदान की प्रक्रिया को तरज़ीह देनी है ताकि छात्र अपने नेताओं का चयन खुद करें ना कि पार्टी के कार्यकर्ता। इसी के तहत एक स्वतंत्र इकाई के रुप में सभी कॉलेज के संगठन के सदस्यों ने चार प्रतिनिधियों को चुना और सच्चे लोकतंत्र की परिभाषा गढ़ते हुए चयन प्रक्रिया को ऐतिहासिक बना डाला।

साल 2010-11 के लिए मुद्दे

प्रवेश

ओबीसी प्रवेश में पारदर्शिता अक्सर ही ऐसा होता है कि ओबीसी कोटा होने के बावजूद ज्यादतर कॉलेजों में सीट खाली रह जाते हैं और स्टूडेंट्स का एडमिशन भी नहीं हो पाता। NSUI की मांग है कि प्रवेश के वक्त ओबीसी छात्रों का एक अलग पंजीकरण प्रक्रिया हो और सभी कॉलेज उन्हें प्रथम सूची में मौजूद तमाम कोटा राहत देने का प्रयास करें।

एसटी, एससी प्रवेश अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को भी ये आज़ादी मिलनी चाहिए कि वे दूसरे छात्रों की तरह ही अपने कॉलेज का चयन कर सकें की उन्हें कहां जाना है।

परीक्षाएं और अध्ययन

आंतरिक मुल्यांकन प्रणाली के चलन में आए हुए कुछ साल ही हुए हैं लेकिन लगातार इससे जुड़ी शिकायतें छात्रों के द्वारा आती रहती हैं कि विश्वविद्यालय स्तर पर इसे मनमाने ढंग इस्तेमाल में लाया जाता है। NSUI मांग करता है कि इस तरह के कार्यकलापों को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए।

परिणामों की घोषणा विश्वविद्यालय के सभी परिणामों की घोषणा निश्चित तौर पर अगले सेशन के शुरु होने से पहले की जानी चाहिए और मांगे जाने पर छात्रों को उनके मुख्य परीक्षा की कॉपी भी मुहैया करानी चाहिए।

सभी महाविद्यालयों में और भी ज्यादा शॉर्ट टर्म कोर्सेज़ और जॉब ओरिएंटेड कोर्स शुरु होने चाहिए।

साथ ही सभी कॉलेजों में बीए पाठ्यक्रमों में अनुप्रयोगिक विषयों को शामिल किया जाना चाहिए। सभी महाविद्यालयों में रैप का होना भी नितांत आवश्यक है वो भी ना सिर्फ प्रवेश स्तर पर बल्कि ऊंचे स्तर पर होनेवाले बदलावों के दौरान भी। सभी कॉलेज में नेत्रहीन छात्रों के लिए ब्रेल सॉफ्टवेयर और उनके लिए अलग से कंप्यूटर की व्यवस्था होनी चाहिए।

फेलोशिप

सामाजिक और आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग से आनेवाले छात्रों के लिए फेलोशिप के अलावा छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए छात्राओं को स्पेशल फेलोशिप देने का प्रोविजन होना चाहिए।

यौन उत्पीड़न के खिलाफ समिति

डूसू के निर्वाचित पदाधिकारी को विश्वविद्यालय के यौन उत्पीड़न मामलों के खिलाफ बनी समिति का सदस्य बनाना चाहिए। साथ ही यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों की मदद के लिए विश्वविद्यालय के द्वारा एक पूर्णकालिक सलाहकार की नियुक्ति की जानी चाहिए और यौन उत्पीड़न के तमाम मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए तेज न्याय प्रक्रिया होनी चाहिए ताकि इससे संबंधित किसी भी तरह की शिकायत के खिलाफ फैसले में महीने भर से ज्यादा का वक्त ना लगे।

परिवहन

यूनिवर्सिटी कैंपस में परिवहन व्यवस्था दुरुस्त हो और साइकिलरिक्शा के किराए को नियंत्रण में रखा जाए।

यू-स्पेशल सर्विस को बेहतर बनाने के लिए ऑन टाइम सर्विस के अलावा फ्रीक्वेंसी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाए।

एनसीआर में यू-स्पेशल के लिए नोएडा और गुडगांव में और ज्यादा जगहों को जोड़ा जाए।

महिलाओं के प्रत्येक यू-स्पेशल में कम से कम एक सुरक्षा प्रभारी की मौजूदगी सुनिश्चित हो।

आवास

कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम पर कॉलेज छात्रावास से निकाले गए छात्रों के पूरी तरह से पुनर्वास की व्यवस्था की जाए जिसमें वाई-फाई इंटरनेट, अच्छे और जरुरी फर्नीचर एवं लाइटिंग और साथ में व्यवस्थित कॉमनरुम जैसी सुविधाएं मौजूद हों।

लड़कियों के लिए ज्यादा छात्रावास बनाए जाएं, खासतौर पर उन महाविद्यालयों में जहां सिर्फ लड़कों के लिए छात्रावास हैं।

छात्रों को ब्रोकर्स के चंगुल से बचाने के लिए छात्रावासों, पीजी और फ्लैट्स की सूची तैयार कर उन्हें प्रकाशित किया जाए ताकि सभी छात्र उसका लाभ ले सकें और किसी भी तरह के उल्लंघन के बाद उस प्रॉपर्टी को ब्लैक लिस्टेड करने की प्रक्रिया भी हो।

छात्रावास और मेस में वितरित होनेवाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को बढ़ाया जाए।

किराया, पीजी और छात्रावास के कॉन्ट्रैक्ट अवधि को ग्यारह महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया जाए और लड़कियों के छात्रावास के लिए कर्फ्यू वक्त को बढ़ाया जाए।

सूचना प्रसार

एक डीयू सूचना तंत्र की स्थापना की जाए जो स्कॉलरशिप, महत्वपूर्ण घोषणाओं, टाइम-टेबल, परिणामों की तिथि और सेंट्रल प्लेसमेंट सेल संबंधी जानकारी मुहैया करा सके। साथ ही डूसू का एक सक्रिय वेबसाइट हो जिसमें सभी कॉलेज की महत्वपूर्ण जानकारियां और माइक्रोसाइट्स मौजूद हो।

Let us be the change we wish to see in the world

NSUI के प्रचार में मितव्ययिता की झलक

पैसा बोलता है....लेकिन क्या चंद उद्देश्यों की पूर्ति और अपने फायदे के लिए पैसे को पानी की तरह बहाना शायद ना तो खुद के विकास के लिए अच्छा है और ना ही देश के विकास के लिए...वो भी ख़ासकर तब जबकि हमारा देश मंदी से उबरने में अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगा है। हमेशा से होता आया है कि चुनाव के नाम पर ढेर सारे पैसे खर्च किए जाते हैं...चुनाव प्रचार में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है....जैसा की इसबार डूसू इलेक्शन में देखने को मिल रहा है....जहां कुछ पार्टी प्रचार अभियान में जमकर पैसे लुटा रही है वहीं NSUI ने मितव्ययिता को तरज़ीह दिया है।

लिंग्दोह समिति की सिफारिशों का ध्यान रखते हुए NSUI ने अपना पूरा चुनावी अभियान कम से कम खर्च में चलाने का जिम्मा लिया है। कम पैसे में चुनाव लड़ने और निष्पक्ष ढंग से चुनाव जीतने के मकसद से प्रत्याशी कॉलेज स्तर पर छात्रों से संपर्क साधने में लगे हैं...NSUI के सभी प्रत्याशी अलग-अलग समूहों के लोगों से सीधे संपर्क कर रहे हैं ताकि चुनाव की गति को बल मिल सके और साथ ही मितव्ययिता से बचे पैसे का इस्तेमाल जनकार्यों में किया जा सके।

यही वजह है कि NSUI ने अपने प्रचार अभियान में सोशल नेटवर्किंस साइट्स की सहायता भी ली है ताकि सूचना क्रांति के इस सशक्त माध्यम के जरिए जनता से सीधे तौर पर जुड़ा जा सके। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स, Twitter, फेसबुक और ऑरकुट, जैसी साइट्स के माध्यम से NUSI के कार्यकर्ता कंप्यूटर पर मौजूद छात्रों से समर्थन की अपील कर रहे हैं। फेसबुक, ऑरकुट पर NUSI के हर उम्मीदवार का प्रोफाइल बनाया गया है। जिससे हमारी Young Youth को उनकी छवि के बारे में पता चल सके। वहीं एनएसयूआईडूसू2010डॉटब्लॉगस्पॉटडॉटकॉम [http://nsuidusu2010.blogspot.com/] के नाम से एक ब्लॉग भी बनाया गया है... जिस पर NUSI के डूसू चुनाव से जुडी हर जानकारी मौजूद है साथ ही पिकासा पर एलबम बनाए गए हैं जिसमें प्रत्याशियों की प्रचार करती तस्वीरें मौजूद हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम के जरिए NUSI के समर्थक साइबर कैफे से, कार्यालयों से और अपने घरों से दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र मतदाताओं को NUSI पैनल के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं| जाहिर है एनएसयूआई किसी भी रुकावट को सामने नहीं आने देना चाहती ताकि छात्रों को एक कुशल नेतृत्व मिल सके। और छात्रों तक अपनी बात पहुंचाने का सोशल मीडिया का माध्यम सबसे उपयोगी है |

ब्लॉगस्पॉट, Twitter, जीमेल, Orkut, और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स से Youths से NUSI के पैनल को मतदान करने और भारी बहुमत से जीत दिलाने का आह्वान किया जा रहा है...साथ ही sms के माध्यम से भी NUSI के समर्थक सभी छात्रों को अपने पैनल के बारे में पूरी जानकारी और वोट करने के लिए अपील कर रहे हैं, ताकि जीत आपकी हो...क्योंकि NSUI ने एक ही मंत्र को माना है और वो है "Success is All Yours"

Monday, August 30, 2010

युवाओं में धार भी, रफ्तार भी

किसी देश की प्रगति तब तक संभव नहीं हो सकती जब तक कि उस देश के युवाओं का हाथ और साथ ना मिले। वहीं NSUI से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी “हरीश चौधरी” ने युवाओं को वो धारा कहा- "जो क्रांति और बदलाव के लिए जानी जाती है। जब कोई धारा बिना युवाओं के जोश के साथ बहती है तो उसके वेग में वो बात नहीं होती। लेकिन जैसे ही ये YOUTH मुख्यधारा से जुड़ता है तो इससे देश को एक नई गति मिलती है।"
NSUI ऐसे छात्रों को वो मंच मुहैया कराता है। जिसकी वजह से इनमें नई उमंग, उत्साह, साहस और काम को करने का बल मिलता है। कहते हैं कि युवा जोश से लबरेज़ होते हैं लेकिन सिर्फ जोश से ही सारे कार्य संभव नहीं, इसीलिए NSUI छात्रों को जोश के साथ-साथ होश से भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
रही बात NSUI से संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी “अक्षय कुमार” की...तो सदा से ही सभी को साथ लेकर चलनेवाले अक्षय मानते हैं कि “देश जिस ताक़त और बदलाव को महसूस कर रहा है, उसके लिए NSUI का भी इसमें काफी बड़ा योगदान रहा है। NSUI ने पहली बार राजनीतिक संगठन में छात्राओं तथा ज़मीनी लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की वकालत पर ज़ोर दिया है।"

ये बात तो जगज़ाहिर है कि भारतीय संविधान के रचयिता दलित परिवार से थे। लेकिन NSUI ने दलित छात्रों को भी राजनीतिक मंच पर एक बेहतर शुरूआत का मौका दिया है ताकि इससे समाज और देश का भला हो और भारत जैसे विभिन्नता में एकता के देश में सदैव आपसी सदभाव और भाईचारा बना रहे।

DUSU-2010 MANIFESTO

NATIONAL STUDENTS’ UNION OF INDIA
DUSU-2010
MANIFESTO

"The more one does, the more one attempts, the more one is capable
of doing".
Indira Gandhi

The students of Delhi University have over the last one decade consistently placed their trust on the NSUI, enabling our candidates to win with record margins in most years. This result is not only reflective of the students’ faith in the abilities of the NSUI led DUSU to deliver on its promises, it also reflects a general satisfaction with the pro-student, pro-youth policies of the Congress led UPA government at the Centre. In the last 7 years, the Manmohan Singh government has steadfastly adhered to its mission of focussing on the education sector – whether by setting up new IITs and IIM’s, new Central Universities in all states, increase in mid-day meal and Sarva Shikshya Abhiyan schemes, scholarships for single girl children, Rajiv Gandhi fellowships, and of course the historic Right to Education Act passed earlier this year, which provides compulsory education to all children below the age of 14 years old. This legislation will certainly go a long way in bringing down illiteracy rates and child labour, as children, especially from economically weak and rural backgrounds will be provided with incentives to allow them to continue and complete their education.

A number of candidates across political organisations were disqualified during the students’ union elections last year due to violations of the electoral code of conduct. This year, NSUI, has taken a step forward to ensure that candidates desirous of contesting the elections are chosen by the students themselves, rather than the leadership, as has traditionally been the case. Under the able watchmanship of FAME, an independent agency, members of the organisation from all the colleges have voted for the 4 contestants, thereby bringing about true democracy and once again charting a new course in history.

ISSUES FOR 2010-11

ADMISSIONS

Transparency in OBC admissions: Why is it that in spite of media reports about OBC seats being vacant in most colleges, these students are not able to secure admission? NSUI demands that OBC students have a separate registration process during admission time, and that all colleges give them the full quota of relaxation available to them from the first list itself.
SC, ST admissions: SC and ST students should have the freedom to decide on which college they wish to attend like all other students.

EXAMINATIONS AND ACADEMICS

Despite the fact that the internal assessment system has been in place for quite a few years now, students continue to complain about arbitrary moderation of their internal assessment marks at the university level. NSUI demands that such moderation be stopped immediately.
Declaration of results: All results of the university should be compulsorily declared before the start of the new term.
Final exam scripts should be made available to students, if asked for.
More short term and job oriented add on courses in all colleges.
More choice of foundation and application courses in the B.A. programme should be made available to students in the colleges.
Ramps should be compulsorily there in all colleges, not just at the entrance but also to facilitate movement towards higher floors.
Braille software to be made available in all colleges for blind students, with one computer solely dedicated for their use.

FELLOWSHIPS:

Fellowships for students hailing from the socially and economically deprived sections.
Special fellowships for girl students to encourage more girls to pursue higher education.

COMMITTEE AGAINST SEXUAL HARASSMENT:

One of the elected office bearers of DUSU should be an ex-officio member of the Committee against Sexual Harrassment of the University.
A full time counsellor should be appointed by the university to help victims of sexual harassment.
Speedy justice system in all cases of sexual harassment. In no case should the decision take more than a month from the date of complaint.

TRANSPORT
· Improve transport within Campus and regulate Cycle rickshaw prices.
· Improve the U-Special services, more frequency, on time service
· Add more locations to U-Special within NCR including Noida and Gurgaon
· Presence of at least one security personnel in every U-Special for women.

HOUSING

· Proper rehabilitation of students who have been evicted from college hostels due to common wealth games. This will include provision of services like WiFi internet, good and adequate furniture and lighting, and a well equipped common room.
· More hostels for girls as many colleges have only Boy’s hostels.
· Publishing a list of hostels, PGs and flats for everyone to see so that students are saved from brokers.
· Regulation of rents and other chargeable services in PG’s and flats. Any violation will lead to blacklisting and no one will be allowed to stay in Blacklisted properties.
· Improving the quality of food served in hostels and messes.
· Reduction in contract period of rent/PG/Hostel accommodation from 11 months to 6 months.
· Increase in the curfew time for girl’s hostels.

INFORMATION DISSEMINATION

· Formation of a DU information cell, which will provide all information regarding scholarships, important announcements, time table schedules, date for results and Central Placement Cell information.
· Active DUSU website with microsites for all colleges.

Let us be the change we wish to see in the world

DUSU ELECTION 2010 के चार चेहरे

केन्द्र की राजनीति से बिलकुल इतर, लेकिन उनके आधार स्तंभ के तौर पर सियासी मुख्यधारा में छात्रों की सक्रियता का अंदाजा महज इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रारंभिक दौर में ही समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व की पहचान और विकास की ओर अग्रसर युवाओं में अपनी पैठ बनाते संगठन के बहुआयामी कुछ चेहरों ने नेतृत्व की बागडोर थाम ली है...मूलमंत्र है – “SUCCESS IS ALL YOURS” और मांग है – “VOTE, SUPPORT & ELECT”। तो आईये जानते हैं डूसू पैनल के उन चार कर्मठ उम्मीदवारों को जिनके सहारे एक बार फिर NSUI तैयार है आपके लिए एक कुशल नेतृत्व की कमान देने को।

HARISH CHAUDHARY
PRESIDENT, PANEL NO. - 5


एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अरविंदों कॉलेज हिंदी के विद्यार्थी है। इससे पूर्व हरीश नॉर्थ कैम्पस के विद्यार्थी भी रहे है। इस कारण नॉर्थ कैम्पस हो या साउथ कैम्पस सभी कॉलेजों में हरीश के राजनैतिक-सामाजिक गतिविधियों के कारण छात्रों में अच्छी पहुँच है। इसी कारण ही एनएसयूआई के आंतरिक लोकतंत्र चुनावों में भी हरीश के साथ सबसे ज्यादा कॉलेज इकाई तथा प्रतिनिधियों ने अपना समर्थन जाहिर किया। यमुना पार इलाके के रहने वाले हरीश को स्थानीय छात्र होने के कारण अच्छा सहयोग प्राप्त है।

A.A.VARDHAN CHAUDHARY
VICE PRESIDENT, PANEL NO. - 1
वर्धन चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय, रामजस कॉलेज के बीकॉम पास कोर्स के विद्यार्थी है। वर्धन न केवल डूसू में उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार है बल्कि संगठन में दिल्ली प्रदेश एनएसयूआई के उपाध्यक्ष है। इसके साथ ही वर्धन रामजस कॉलेज काउन्सलर के साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के एग्ज्यूकिटिव सदस्य भी रहे है। वर्धन दिल्ली विश्वविद्यालय नॉर्थ कैम्पस में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन कर चुके हैं।

DEEPIKA DESHWAL

SECRETARY, PANEL NO. - 3
दीपिका देशवाल दिल्ली विश्वविद्यालय के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग की विद्यार्थी है। पिछले पाँच वर्षों से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता के साथ ही एनएसयूआई दिल्ली प्रदेश प्रतिनिधि भी है। दीपिका सत्यवती कॉलेज काउन्सलर के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय एग्ज्यूकेटिव काउंसलर भी रही है। संगठनात्मक भूमिका के तौर प्रदेश महासचिव के तौर पर भी इन्होंने कार्य किया है। खेलो में विशेष योगदान के कारण अनेक पुरुस्कार प्राप्त कर चुकी है।

AKSHAY KUMAR
JOINT SECRETARY, PANEL NO. - 2

अक्षय दिल्ली विश्वविद्यालय के बुद्धिष्ट स्टडीज विभाग में प्रथम वर्ष के छात्र है। पिछले चार वर्ष से सक्रिय राजनीति के साथ ही अक्षय देशबंधु कॉलेज के अध्यक्ष रह चुके हैं। अक्षय कॉलेज काउंसर भी रहे हैं और इसके साथ ही दिल्ली प्रदेश महासचिव के तौर पर संगठन को अपनी सेवाएं दी हैं।

लोकतंत्र का परिचय दिया NSUI ने

अमूमन लोकतंत्र के राज में सत्तातंत्र हावी होता दिखता है...लेकिन संत्तातंत्र की बिसात पर चुने गए हमारे प्रतिनिधि के चुनाव में लोकतंत्र शायद ही अभीतक प्रभावी हो पाया है...यही वजह है कि NSUI ने इसबार ये पहल की और डूसू चुनाव के लिए चुने गए उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में आंतरिक मतदान कराकर लोकतंत्र का मान रख लिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के लिए बिना किसी खास माथापच्ची और बैठकबाजी के ही भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (डूसू) ने अपने अंतिम चार उम्मीदवारों के नाम 21 अगस्त को तय कर लिए। जबकि आमतौर पर प्रत्याशियों का चयन नामांकन वापसी के अंतिम पांच मिनट में होता है। गौरतलब है कि देशभर में किसी भी छात्र संगठन की ओर से पहली बार अपनाई गई आंतरिक मतदान की प्रक्रिया के जरिए जिन चार को चुना गया उनमें हरीश चौधरी, ए.ए.वर्धन चौधरी, दीपिका देशवाल और अक्षय कुमार शामिल हैं।

इस चुनाव प्रक्रिया में NSUI शीर्ष नेतृत्व के साथ ही कांग्रेस पार्टी सचिव तथा NSUI प्रभारी मीनाक्षी नटराजन और फेम पर्यवेक्षक जोसफ मैथ्यू भी मौजूद थे। इस प्रक्रिया के तहत हर दावेदार ने अपने विचार व्यक्त करने में चार मिनट का वक्त लिया। इस दौरान चौदह उम्मीदवारों ने सेमेस्टर सिस्टम से लेकर छात्रों की सुरक्षा और दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। सभी इच्छुक उम्मीदवारों के विचार व्यक्त करने के बाद NSUI के राष्ट्रीय कार्यालय में दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंधित कॉलेज इकाईयों और प्रतिनिधियों ने अपने पसंद के डीयू उम्मीदावारों के पक्ष में मत डाले।
NSUI दिल्ली के प्रभारी मोहम्मद शाहनवाज चौधरी ने बताया कि दो घंटे तक चले मतदान के दौरान कुल 412 वोट पड़े। इस चुनाव प्रक्रिया में हरीश चौधरी, वर्धन चौधरी और छात्राओं में दीपिका देशवाल और अनुसूचित जाति जनजाति के लिए अक्षय कुमार डूसू पैनल के लिए निर्वाचित हुए।

पैनल में छात्राओं तथा एससी/एसटी आरक्षण

दुनिया के किसी भी राजनीतिक संगठन में छात्राओं तथा हाशिए के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की वकालत करने का अच्छा प्रयास NSUI द्वारा किया गया। जहां दुनिया के सबसे मजबूत देश अमेरिका ने संगठन के आंतरिक लोकतंत्र के तहत चुनकर आए बराक ओबामा देश के राष्ट्रपति बने...उसी तरह NSUI ने दलित छात्रों को संगठन के तहत NSUI पैनल में जगह देकर राजनीतिक खेल में एक सकारात्मक शुरुआत की।

राह NSUI की

एक ऐसा हाथ जिसके सहारे की ज़रूरत ना सिर्फ युवाओं को है, बल्कि देश को भी है, ताकि इसे एक अच्छा और प्रगतिशील नेतृत्व मिल सके। तब नाम आता है NSUI का जिसने एक सफल और कुशल नेतृत्व के लिए युवाओं को अपना आधार बनाया। एक ऐसा संगठन जो छात्रों में बसता है उसकी हर एक अच्छाईयों को उभारता है और प्रेरणा देता है संगठन के जुड़ाव को साथ लेते हुए, देश के लिए कुछ कर गुज़रने का। NSUI भले ही एक संगठन हो, लेकिन इसके ज़रिए छात्र अपने अधिकार और अपने कर्तव्य को बखूबी पहचान पाते हैं। तकरीबन 125 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी से इसका जुड़ाव इसे एक विश्वसनीय संगठनात्मक ढ़ांचा मुहैया कराता है, जिसने देश की आज़ादी और भारतीय लोकतंत्र की नींव को बल प्रदान किया। फिलहाल हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, लेकिन सोच को उस दिशा तक ले जाना वो भी एक संगठन के रूप में काफी अहम हो जाता है। जाहिर है कल्चर और ट्रैडीशन के संदर्भ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराता NSUI लोगों को एक समान अवसर मुहैया कराता है उन्हें ये समझ देता है कि वो जात-पात, रंग-भेद से ऊपर उठकर काम करे। ज़ाहिर है जब एक संगठन आपके साथ हो और आपके सभी सपने को साकार कर दे तो फिर विकल्प की तलाश आखिर क्यों होगी।और अगर हुई भी तो NSUI का अगला विकल्प भी NSUI ही होगा ।

What NSUI is today !

NSUI is today, not only India’s, but one of the world’s largest students’ movements. We represent each and every student of this country. We pursue an inclusivist, pluralist and a socialist agenda. The premiere students’ body of India represents the hopes and aspirations of millions of India students, irrespective of their caste, creed, regional, religious or linguistic identities.
The origins of students’ movement in this country dates back to the origin of the whole concept of organized movement. And so does the history of the philosophy that NSUI’s existence. Infact, history bears testimony to the fact that no movement worldwide has ever been successful without an active participation of the students. Several thousands of well-read, intelligent and capable students, who could have comfortably chased their educations mid-way and jumped the bandwagon of Mahatma Gandhi’s call, in pursuit of something much more significant. NSUI salutes this spirit and owes its existence largely to this school of thought. We take pride in being the legacy of this great movement for Indian independence.

Student Activism
NSUI is constituted with the aim of social empowerment, and all the programs of NSUI are aimed at development of India at every level. We organize blood donation camps, tree planting drives, education drives, etc.
NSUI welcomes all students, regardless of your financial capacity, religion, caste, social status. We welcome every youngster with the intention of creating a better tomorrow, a better India for all Indians.

The Revolution
We have embarked on a new journey which will see young leaders emerge from the grass root. The organization is undergoing a transformation to enable us to become more accessible and transparent to students across the nation.

Structure - College, District and State Units
Every college will have an NSUI committee - with x members. There is a president, Vice President and other office bearers, all elected by NSUI members of that college. The comittee is the mode of communication for resources, activities, etc between the NSUI organization and the college.College Committees within a district vote to elect the district unit as well as the state unit. More information about the structure of the organization will be provided shortly