Tuesday, August 31, 2010

डूसू चुनाव 2010 घोषणापत्र

डूसू चुनाव 2010 घोषणापत्र

The more one does, the more one attempts, the more one is capable of doing.

Indira Gandhi

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से एनएसयूआई पर अपना भरोसा बना रखा है। हमारे उम्मीदवार पिछले काफी सालों से रिकॉर्ड मार्जिन के साथ जीत हासिल करते रहे हैं। इस नतीजे से केवल एनएसयूआई के छात्रों की आस्था चिंतनशील नहीं है। डूसू ने अपने वायदे को वितरित करने के लिए नेतृत्व किया है। यह कार्य समर्थक छात्र के साथ एक सामान्य संतुष्टि को दर्शाता है, वहीं समर्थक युवा नीतियों के जरिए कांग्रेस ने केन्द्र में यूपीए सरकार का नेतृत्व किया है। पिछले सात वर्षों में मनमोहन सिंह सरकार ने लगातार शिक्षा के क्षेत्र में ध्यान केंद्रित करने के अपने मिशन का पालन किया है। चाहे नए आईआईटी और आईआईएम की स्थापना हो, सभी राज्यों में नए केंद्रीय विश्वविद्यालय, मध्याह्न भोजन पर खास जोर, सर्वशिक्षा अभियान को बढ़ावा या फिर छात्राओं के लिए छात्रवृति का प्रबंध, राजीव गांधी फेलोशिप और इसी साल पास किया गया ऐतिहासिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम..जो कि 14 साल के कम उम्र के बच्चों को तमाम जरुरी शिक्षा मुहैया कराता है। ये विधेयक निश्चित तौर पर आर्थिक रुप से पिछड़े और ग्रामीण परिवेश के बच्चों में निरक्षरता दर और बाल मजदूरी को कम करने में सहायक साबित होगा ताकि बच्चे अपनी जरुरतों के पूरा करते हुए अपनी शिक्षा को पूरा कर सकें।

पिछले साल छात्र संगठन चुनाव के दौरान कई राजनीतिक पार्टियों के बहुतेरे ऊम्मीदवार सिर्फ इस बात को लेकर असफल हो गए थे क्योंकि उन्होने चुनावी आचारसंहिता का उल्लंघन किया था। इस साल NSUI ने एक कदम आगे बढ़कर ये सुनिश्चित किया कि परंपरागत रुप के बजाए उन्हें आंतरिक मतदान की प्रक्रिया को तरज़ीह देनी है ताकि छात्र अपने नेताओं का चयन खुद करें ना कि पार्टी के कार्यकर्ता। इसी के तहत एक स्वतंत्र इकाई के रुप में सभी कॉलेज के संगठन के सदस्यों ने चार प्रतिनिधियों को चुना और सच्चे लोकतंत्र की परिभाषा गढ़ते हुए चयन प्रक्रिया को ऐतिहासिक बना डाला।

साल 2010-11 के लिए मुद्दे

प्रवेश

ओबीसी प्रवेश में पारदर्शिता अक्सर ही ऐसा होता है कि ओबीसी कोटा होने के बावजूद ज्यादतर कॉलेजों में सीट खाली रह जाते हैं और स्टूडेंट्स का एडमिशन भी नहीं हो पाता। NSUI की मांग है कि प्रवेश के वक्त ओबीसी छात्रों का एक अलग पंजीकरण प्रक्रिया हो और सभी कॉलेज उन्हें प्रथम सूची में मौजूद तमाम कोटा राहत देने का प्रयास करें।

एसटी, एससी प्रवेश अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को भी ये आज़ादी मिलनी चाहिए कि वे दूसरे छात्रों की तरह ही अपने कॉलेज का चयन कर सकें की उन्हें कहां जाना है।

परीक्षाएं और अध्ययन

आंतरिक मुल्यांकन प्रणाली के चलन में आए हुए कुछ साल ही हुए हैं लेकिन लगातार इससे जुड़ी शिकायतें छात्रों के द्वारा आती रहती हैं कि विश्वविद्यालय स्तर पर इसे मनमाने ढंग इस्तेमाल में लाया जाता है। NSUI मांग करता है कि इस तरह के कार्यकलापों को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए।

परिणामों की घोषणा विश्वविद्यालय के सभी परिणामों की घोषणा निश्चित तौर पर अगले सेशन के शुरु होने से पहले की जानी चाहिए और मांगे जाने पर छात्रों को उनके मुख्य परीक्षा की कॉपी भी मुहैया करानी चाहिए।

सभी महाविद्यालयों में और भी ज्यादा शॉर्ट टर्म कोर्सेज़ और जॉब ओरिएंटेड कोर्स शुरु होने चाहिए।

साथ ही सभी कॉलेजों में बीए पाठ्यक्रमों में अनुप्रयोगिक विषयों को शामिल किया जाना चाहिए। सभी महाविद्यालयों में रैप का होना भी नितांत आवश्यक है वो भी ना सिर्फ प्रवेश स्तर पर बल्कि ऊंचे स्तर पर होनेवाले बदलावों के दौरान भी। सभी कॉलेज में नेत्रहीन छात्रों के लिए ब्रेल सॉफ्टवेयर और उनके लिए अलग से कंप्यूटर की व्यवस्था होनी चाहिए।

फेलोशिप

सामाजिक और आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग से आनेवाले छात्रों के लिए फेलोशिप के अलावा छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए छात्राओं को स्पेशल फेलोशिप देने का प्रोविजन होना चाहिए।

यौन उत्पीड़न के खिलाफ समिति

डूसू के निर्वाचित पदाधिकारी को विश्वविद्यालय के यौन उत्पीड़न मामलों के खिलाफ बनी समिति का सदस्य बनाना चाहिए। साथ ही यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों की मदद के लिए विश्वविद्यालय के द्वारा एक पूर्णकालिक सलाहकार की नियुक्ति की जानी चाहिए और यौन उत्पीड़न के तमाम मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए तेज न्याय प्रक्रिया होनी चाहिए ताकि इससे संबंधित किसी भी तरह की शिकायत के खिलाफ फैसले में महीने भर से ज्यादा का वक्त ना लगे।

परिवहन

यूनिवर्सिटी कैंपस में परिवहन व्यवस्था दुरुस्त हो और साइकिलरिक्शा के किराए को नियंत्रण में रखा जाए।

यू-स्पेशल सर्विस को बेहतर बनाने के लिए ऑन टाइम सर्विस के अलावा फ्रीक्वेंसी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाए।

एनसीआर में यू-स्पेशल के लिए नोएडा और गुडगांव में और ज्यादा जगहों को जोड़ा जाए।

महिलाओं के प्रत्येक यू-स्पेशल में कम से कम एक सुरक्षा प्रभारी की मौजूदगी सुनिश्चित हो।

आवास

कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम पर कॉलेज छात्रावास से निकाले गए छात्रों के पूरी तरह से पुनर्वास की व्यवस्था की जाए जिसमें वाई-फाई इंटरनेट, अच्छे और जरुरी फर्नीचर एवं लाइटिंग और साथ में व्यवस्थित कॉमनरुम जैसी सुविधाएं मौजूद हों।

लड़कियों के लिए ज्यादा छात्रावास बनाए जाएं, खासतौर पर उन महाविद्यालयों में जहां सिर्फ लड़कों के लिए छात्रावास हैं।

छात्रों को ब्रोकर्स के चंगुल से बचाने के लिए छात्रावासों, पीजी और फ्लैट्स की सूची तैयार कर उन्हें प्रकाशित किया जाए ताकि सभी छात्र उसका लाभ ले सकें और किसी भी तरह के उल्लंघन के बाद उस प्रॉपर्टी को ब्लैक लिस्टेड करने की प्रक्रिया भी हो।

छात्रावास और मेस में वितरित होनेवाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को बढ़ाया जाए।

किराया, पीजी और छात्रावास के कॉन्ट्रैक्ट अवधि को ग्यारह महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया जाए और लड़कियों के छात्रावास के लिए कर्फ्यू वक्त को बढ़ाया जाए।

सूचना प्रसार

एक डीयू सूचना तंत्र की स्थापना की जाए जो स्कॉलरशिप, महत्वपूर्ण घोषणाओं, टाइम-टेबल, परिणामों की तिथि और सेंट्रल प्लेसमेंट सेल संबंधी जानकारी मुहैया करा सके। साथ ही डूसू का एक सक्रिय वेबसाइट हो जिसमें सभी कॉलेज की महत्वपूर्ण जानकारियां और माइक्रोसाइट्स मौजूद हो।

Let us be the change we wish to see in the world

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