Wednesday, September 1, 2010

साम्प्रदायिक विचारधारा की पोषक है ABVP

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव के NSUI से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी “हरीश चौधरी” ने कहा कि हिंदुस्तान की राजनीति में तीन तरह की राजनैतिक विचारधारा महत्वपूर्ण रुप से कार्य करती है। एबीवीवी की विचारधारा जो साम्प्रदायिकता, हिंसा और अराजकता का माहौल पैदा कर सत्ता में आना चाहती है। गोधरा से कंदमाल तक दंगों की सियासत करते है। वहीं दूसरी तरफ साम्यवादी-नक्सली विचारधारा है जो हिंसा का रास्ता अख्तियार कर सत्ता हासिल करना चाहती है जबकि मैं उस विचारधारा का समर्थक हूँ, जो देश के संविधान में विश्वास करती है तथा लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष-समाजवादी भारत के निर्माण में संलग्न है। श्री चौधरी ने आगे कहा कि एनएसयूआई का मानना है कि भारत में रहने वाले हर भारतीय का यह देश है। इसके विकास और निर्माण में उसका योगदान महत्वपूर्ण है सबकी साम्प्रदायिक विचारधारा की पोषक एबीवीपी मात्र धर्म और जाति की राजनीति कर डूसू में आंतक का माहौल पैदा करना चाहती है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए और ना ही आज का पढ़ा लिखा वर्ग ऐसी बातों में अपना विश्वास रखता है।

NSUI से संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशीअक्षय कुमारनेनार्थ कैम्पस के सभी छात्रों को ये कहा कि सभी कमज़ोर औरपिछड़े वर्गों के सभी छात्रों को छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए।एन.एस.यू.आई ने पहली बार आतंरिक मतदान प्रक्रिया कोअपना कर लोकतंत्र का भी मान रखा। अक्षय ने कहा किओबीसी कोटा होने के बावजूद ज्यादतर कॉलेजों में सीट खालीही रह जाती हैं और स्टूडेंट्स का एडमिशन भी नहीं हो पाताउन्होंने इस बात की मांग कि ओबीसी छात्रों के लिए अलगपंजीकरण प्रक्रिया हो। अनुसूचित जाति और जनजाति केछात्रों को ये आज़ादी होनी चाहिए कि वो दूसरे छात्रों की तरहही अपने कॉलेज को बिना किसी बाधा के चुन सकें।


दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव के NSUI से उपाधयक्ष पद के उम्मीदवार ..वर्धन चौधरी ने कहा कि हम सेमेस्टर सिस्टम के खिलाफ नहीं बल्कि उसके प्रभावी ढंग से लागू किए जाने को लेकर सज़ग हैं।जब तक हमारे छात्र-छात्राओं के लिए दिल्ली विश्वविधालय में मूलभूत सुविधाओं का प्रबंध नहीं हो जाता तब तक हम इसके खिलाफ हैं। यूजीसी ने सेमेस्टर सिस्टम को पूरे देश में लागू करने की बात कही है जबकि डीयू में अभी पूरे वार्षिक स्तर पर रिज़ल्ट नहीं पाता तो ऐसे में इसको कैसे लागू किया जा सकता है।उन्होंने आगे कहा कि हमें अपने पूरे संसाधनों को एकजुट करके इसे लागू करना चाहिए।



जबकि अपने कैंपेन के दौरान बाहरी दिल्ली के सभी कॉलेजों में गई सचिव पद की प्रत्याशी दीपीका देशवाल ने भारत में खेलों की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए। वो खुद एक जूडो ओर कराटे की खिलाडी हैं। उन्होनें राष्टमंडल खेलों के सफल आयोजन के लिए भी कामना की और ये माना कि इससे देश में खेलों को बढ़ावा मिलेगा और देश को अन्तर्राष्टीय स्तर के मैदान फैसीलिटी मिलेगी। दीपिका ने लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी चिंता जताई और सुरक्षा ढाचें में सुधार की ज़रूरत को महसूस किया। साथ ही लड़कियों के हॉस्टल संबंधी प्रबंध हों ताकि छात्राओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो।उन्होंने इस बात को भी माना की दिल्ली विश्वविधालय में लड़कियों के हॉस्टल काफी कम हैं उनका निर्माण होना चाहिए।

5 comments:

  1. @ Mr Harish Chaudhary...
    Mr Harish Chaudhary....You are squarely correct in your stand against communalism. I also appreciate that you have committed to constitution.. but I strongly feel that communalism, racism, fascism, socialism or any of ism have any place in student politics..

    Congress leaders have repeatedly justified universities elections on the basis of a common statement that- student union are something very different from political party....

    So in my perception, your theme of election should be something for the welfare of students....precisely speaking students of DU..
    Jai Hind

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  2. @ Akshay Kumar......
    Its so nice that someone has taken stand for the backward class students....Even in place like Delhi such students have not got what they ought to...

    So Mr. Akhay...My best wishes are you...and I hope after winning u remain a statesman and not a politician...

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  3. @ Mr Vardhan...

    You have not given an iota of space for debate.....All the best

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  4. @ Deepika........

    Miss Deepika........you are having a very attractive profile and people like you.... especially girl like you always gives an impreesion- " Still der are good people in politics and still der are who are joining"

    I am not such a big personality to give you any advise. But putting our perception is something that is core of our platform...The Indian National Congress...

    Miss Deepika...very often I see headlines-" Delhi is not safe for woman". Eve teasing and even extreme forms like rape are on high time....What I feel is that 1% of suffered girls only admit about their incident...rest are on blank papers for very obvious reason...So I request you to take this issue as your nucleus of ur issues...
    all the best

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  5. Gud Luck
    Oll of you..............

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